आईआईटी इंदौर की बड़ी उपलब्धि: माइक्रो 3डी प्रिंटर अब होगा इंडस्ट्री में तैयार

इंदौर
 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर ने माइक्रो एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीक का लाइसेंस वीफ्यूज मेटल प्रालि को प्रदान किया है। यह कदम आईआईटी की प्रयोगशाला में विकसित तकनीक को उद्योग तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस तकनीक को लेजर डेकल ट्रांसफर (एलडीटी) आधारित माइक्रो 3डी प्रिंटर कहा जाता है, जिसे संस्थान के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की शोधकर्ताओं की टीम ने विकसित किया है। अधिकारियों के मुताबिक अब इस तकनीक की मदद से कंपनी इंडस्ट्री प्रोडक्शन शुरू कर सकेगी। जल्द ही बाजार में माइक्रो 3डी प्रिंटर उपलब्ध हो सकेगा।

माइक्रो एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर संस्थान की प्रयोगशाला में दो साल से अधिक समय से शोधकार्य किया जा रहा है। इसमें मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. पलानी आनंद, प्रो. विपुल सिंह, डॉ. अंशु साहू और शोधार्थी कृष्ण तोमर का अहम योगदान रहा है।

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यह माइक्रो 3डी प्रिंटर बेहद पतली परतों वाले मटेरियल (थिन फिल्म फीडस्टाक) का उपयोग करके सूक्ष्म और अत्यंत सटीक डिजाइन बनाने में सक्षम है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह मटेरियल की बर्बादी को कम करता है, जिससे लागत कम होती है और परिणाम अधिक सटीक मिलते हैं।
इन क्षेत्रों में होगा उपयोग

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यह उन्नत तकनीक उन क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी, जहां सूक्ष्मता और उच्च सटीकता की आवश्यकता होती है। इनमें माइक्रो इलेक्ट्रानिक्स, बायोमेडिकल उपकरण, पहनने योग्य (वियरेबल) तकनीक, उन्नत सेंसर, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं। इस तकनीक से न केवल उद्योगों को लाभ होगा, बल्कि यह भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक अहम कदम सिद्ध होगा।
रिसर्च से समाज को दिशा

आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रो. सुहास एस. जोशी ने कहा कि यह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर संस्थान की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके अंतर्गत अनुसंधान को समाज पर वास्तविक प्रभाव डालने वाला बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान के संकाय सदस्य अब अपनी शोध गतिविधियों को प्रयोगशाला से आगे बढ़ाकर उद्योग की जरूरतों से जोड़ रहे हैं।

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संस्थान के अनुसंधान एवं विकास के अधिष्ठाता प्रो. अभिरूप दत्ता ने कहा कि यह साझेदारी इस बात का प्रमाण है कि निरंतर शोध और नवाचार से कैसे मजबूत औद्योगिक सहयोग स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आईआईटी इंदौर अपनी अत्याधुनिक तकनीकों को व्यावसायिक समाधानों में बदलने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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